[Chorus]
उल–झन, उल–झन,
मैं–ने किया फिर क्या?
सिर घूम रहा है,
गल–ती फिर हो गई।
उल–झन, उल–झन,
हँ–सी रोके न पाए,
य–ही है ह–कीकत,
इ–से लो हल–के से
और आन–ंद लो।
[Verse
1]
सब कुछ यहाँ बह–ता,
जै–से नदी का पानी,
उल–झन कूद–ती है,
दिल हो जाता भ्र–मित।
सूर–ज चमक–ता है,
ध्वनि हवा में है,
उल–झन बन जाए गीत।
[Verse
2]
फूल–ों का मै–दान,
सुगं–धें मिल–ती हैं,
फिर से उल–झ जाते,
तो क्या करें हम?
सब हँ–सते हैं,
हाथ हवा में,
आ–ओ ना–चें हम,
दुन–िया है जै–से
सित–ारों का स–पना।
[Chorus]
उल–झन, उल–झन,
मैं–ने किया फिर क्या?
सिर घूम रहा है,
गल–ती फिर हो गई।
उल–झन, उल–झन,
हँ–सी रोके न पाए,
य–ही है ह–कीकत,
इ–से लो हल–के से
और आन–ंद लो।
[Verse
3]
अगर यो–जना थी,
सब कुछ साफ था,
उल–झन आई,
सब कुछ उल–झा दिया।
खुद पर हँ–सता हूँ,
शुरू कर उल–झ–ना,
उल–झन से,
थो–ड़ा और सीख–ता हूँ।
[Verse
4 / Outro]
ऐ–सा जब उल–झन हो,
कभी मज़ा गल–ती में,
उल–झन साथ रहती,
हर कदम, हर नि–र्णय।
हँ–सी भी साथ,
भ–ले सब पूरा न हो,
उल–झन देती है
दुन–िया का नया दृ–श्य।
क्योंकि उल–झन में
एक छुप–ा क्रम है,
ज़िन–दगी है न–ृत्य,
कुछ नहीं ज़र–ूरी।
[Chorus
/ Outro]
उल–झन, उल–झन,
मैं–ने किया फिर क्या?
सिर घूम रहा है,
गल–ती फिर हो गई।
उल–झन, उल–झन,
हँ–सी रोके न पाए,
य–ही है ह–कीकत,
इ–से लो हल–के से
और आन–ंद लो।